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बढते कदम

सफलता की सच्ची कहानियाँ…

गौरव पथ बना तलवास का गर्व

बूंदी जिले की नैनवा तहसील का तलवास गांव प्राकृतिक सुंदरता के लिए आस-पास के क्षेत्रों में मशहूर है। पहाडियों से घिरे इस गांव में घने पेडों वाले बाग और पहाडों के बीच विशाल  झील यहां की विशेषता है। इतनी प्राकृतिक सुंदरता के बावजूद गांव में सफाई और सडक जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। गांव के बीच से निकलने वाली मुख्य सड़क ही आवागमन का एकमात्र जरिया थी। अब गांव की मुख्य सड़क के अलावा एक नई सीसी रोड तैयार हो गयी है। ग्रामीण गौरवपथ के दूसरे चरण के तहत बनाई गई इस सडक पर 47 लाख 99 हजार रूपये खर्च हुए। 700 मीटर लंबी इस सडक के किनारे नालियां भी बनाई गई हैं ताकि पानी के कारण सडक को कोई नुकसान ना हो। सडक बनाने वाले ठेकेदार से इसकी तीन साल की गारंटी भी ली गई है। इस दौरान सडक का रख-रखाव करने की जिम्मेदारी उसी की होगी। इस सडक के बनने से गांव का एक से दूसरा कौना आपस में जुड गया है और लोगों की समस्या समाप्त हो गयी है। यह सड़क वाकई तलवास गांव का गौरव पथ नजर आती है।

तलवास की प्रसिद्ध झील के किनारे सरकार घाट भी बनवा रही है जिससे लोगों को स्नान करने की सुविधा भी मिल जाएगी। झील के एक किनारे पर पाल भी बनाई जा रही है। भविष्य में इस झील के पानी को साफ करने की योजना है।

अनुराग वाजपेयी, सहायक निदेशक, एफओबी, कोटा

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ई मित्र प्लस से आसान हुई सरकारी योजनाओं तक पहुंच

केन्द्र सरकार की डिजिटलाईजेशन योजना का लाभ अब ग्रामीण स्तर पर पहुंचने लगा है। बूंदी जिले के नमाना ग्राम में अटल सेवा केन्द्र में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से ई-मित्र प्लस कियोस्क लगाया गया है। यह कियोस्क मशीन  देखने में एटीएम जैसी नजर आती है। इसमें 32 इंच एलईडी के साथ मोनीटर वैब कैमरा कार्ड रीडर और लेजर प्रिंटर भी लगा हुआ है। इसके माध्यम से ग्रामीण ई-मित्र के जरिये मिलने वाली अनेक सुविधाऐं जैसे जमा बंदी की नकल मूल निवास प्रमाण पत्र आदि प्राप्त कर सकेंगे और बिजली तथा पानी की बिल भी जमा करवा सकेंगे। मशीन के वैब कैमरे से ग्रामीण उच्च अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये बातचीत भी कर सकते है। इस मशीन में विभिन्न सुविधाओं कें लिये भुगतान भी नकद में प्राप्त करने की सुविधा है। बूंदी जिले में एसी 90 मशीनें  लगाई जा रही हैं। ई-मित्र प्लस के उपयोग के लिए व्यक्ति को एक आईडी बनानी होती है और टच स्क्रीन के जरिए विभिन्न सूचनाएं दर्ज करवायी जा सकती हैं। भुगतान की रसीद भी तत्काल मिल जाती है। गांव में ई-मित्र प्लस को लेकर काफी उत्साह है और लोग इसका फायदा उठाने लगे हैं।

अनुराग वाजपेयी, सहायक निदेशक, एफओबी, कोटा

मन की बात

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 31 दिसम्बर 2017 को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम का राजस्थान स्थित अलवर] सवाईमाधोपुर कोटा  और बाड़मेर इकाईयों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष प्रचार किया गया। इस दौरान रेडियो और टीवी के माध्यम से मन की बात का प्रसारण किया गया।  इस अवसर पर ग्रामीणजनों के बीच मन की बात को लेकर समूह चर्चा आयोजित की गयी। बाड़मेर जिले के महाबार आदर्श महाबार और रानीगाँव  में पहली बार ऐसे कार्यक्रम हुए। ये गाँव भारत पाकिस्तान सीमा के पास हैं। इसी प्रकार सवाईमाधोपुर जिले के वन क्षेत्र के गाँव में ये कार्यक्रम हुए। कुल 8 गाँव कवर किये गये जिनमें 89 लोगों से जनप्रतिक्रिया संग्रह की गयी। आम तौर पर लोगों ने स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को सराहा। इस दौरान स्थानीय समस्याऐं जैसे रोजगार अकाल और वन क्षेत्र में जंगली जानवरों के कारण होने वाली परेशानियों के मुद्दों को लोगों ने उठाया और आग्रह किया कि मन की बात कार्यक्रमों में इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिये। उपरोक्त कार्यक्रमों का ट्विटर और प्रादेशिक कार्यालय राजस्थान के ब्लाग पर प्रचार प्रसार भी किया गया।

स्वयं सहायता समूह से मिली आत्मनिर्भरता

 ग्रामीन क्षेत्र में रोजगार की उपलब्धता बहुत बड़ी समस्या है। अलवर ज़िले के किशनगढ़बास ब्लॉक के ग्राम जागता बसई की संतोष देवी को भी अपने परिवार के भरण पोषण, बच्चों की अच्छी शिक्षा, सामाजिक ज़िम्मेदारी के लिए आमदनी की आवश्यकता थी, पति के खेत में मजदूरी करने से यह संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में संतोष देवी को ग्राम के पंजाब नेशनल बैंक द्वारा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पशु खरीदने के लिए ऋण की उपलब्धता कराये जाने के बारे में जानकारी मिली। ग्राम में आंगनबाड़ी केंद्र में चलने वाले तारा स्वयं सहायता समूह से जुडने के बाद उन्हें भैंस खरीद के लिए रूपये 50,000/- का ऋण मिला। इस राशि से उन्होने गत वर्ष एक भैंस खरीदी। गाँव में सहकारी समिति के माध्यम से दूध बेच कर व ऋण किश्त चुकाने के बाद लाभ भी हुआ। परिवार के लिए अतिरिक्त आमदनी भी हुई जिससे उनके आर्थिक हालत  में भी सुधार आया।। अब सब्सिडी के बाद वर्तमान में कुछ राशि कि किश्तें ही शेष बची हैं। आज उनके पास दो भैंस हो गयी है। परिवार कि आमदनी बढ़ जाने से संतोष अब पहले से अधिक बच्चों की शिक्षा, भरण पोषण पर खर्च कर पाती हैं। अब स्वयं भी आत्मनिर्भर भी हो गयी हैं, इसका श्रेय वे बैंक की कल्याणकारी योजनाओं को देती है।

संजय बूलचंदनी, क्षेत्रीय प्रचार सहायक, अलवर

 

नयी तकनीक एवं देशी खाद से बढ़ाई पैदावार

नयी तकनीक एवं देशी खाद के उपयोग से जालोर जिले के अगवरी के किसान शांति लाल सुथार ने  बागवानी के क्षेत्र में 45 बीघा जमीन में 3000 अनार एवं 900 नींबू के पेड़ों एवं अन्य फसलों से अपनी पहचान प्रगतिशील किसान के रूप में बनाई है। शांति लाल सुथार  बागवानी में मजदूरों के साथ स्वयं भी हर पेड़ एवं बागवानी के कार्य की रोजाना निगरानी करने के साथ आधुनिक कृषि एवं बागवानी के नये नये तरीकों एवं जरूरत अनुसार मिट्टी पानी की जांच भी करवाते है। शांति लाल के बग़ीचे में तैयार अनार की प्रसिद्धि आस-पास के क्षेत्र में बेदाना सीड के नाम से प्रसिद्ध है तथा नींबू भी उनके बगीचे में सालभर मिल जाते है। शांतिलाल को अनार एवं नींबू से सालाना करीब 15 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है उसी से उन्होने अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रहने के लिए मकान की सुविधा प्रदान की  है । शांतिलाल की प्रसिद्धि के चलते कृषि विभाग जालोर ने उन्हें वर्ष 2014-15 में उन्नत कृषक घोषित किया। जून 2016 में उनको राजस्थान सरकार ने कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी के नेतृत्व में 11 सदस्यों के दल के साथ सात दिन के लिए इजरायल में कृषि एवं पशुपालन के कार्यों को देखने के लिए भिजवाया।  शांति लाल सुथार ने बताया कि इजरायल में एक एक बूंद पानी का सदुपयोग होता है। वहीं पशुपालन में ऐसी नस्ल राखी जाती है जो रोजाना पचास लीटर से अधिक दूध देती है। इन सभी का किसान एवं पशुपालक रोजाना का  कम्प्युटर में हिसाब रखते हैं ।

नरेंद्र कुमार, तकनीकी सहायक, बाड़मेर

 

घर बैठे कमाई

कोटा ज़िले के कैथून में कोटा डोरिया का काम सालों से चला आ रहा है। इस बुनाई के काम से कई परिवारों को रोजगार मिला हुआ है। जिसमे से एक है दिल अफरोश का परिवार। यह परिवार पीढ़ियों से कोटा डोरिया के काम को बखूबी ज़िम्मेदारी से निभाता आ रहा है। इनके द्वारा बनाई गई साड़ी, दुपट्टा, शाल, सलवार सूट आदि कोटा ही नहीं अपितु देश के कई बड़े शहरों में जाते है, जिसमे कोटा शहर को कोचिंग नगरी के नाम के साथ कोटा डोरिया साड़ी नाम से भी पहचान दिलवाई है। दिल अफरोश घर के काम को निपटाने के बाद बुनाई के काम को करती है और महीने के कम से कम 3000 रुपए कमा लेती है, जिससे परिवार के खर्च में हाथ बंट जाता है।

प्रेम सिंह, क्षेत्रीय प्रचार सहायक, कोटा

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