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बढते कदम

सफलता की सच्ची कहानियाँ…

प्रधानमंत्री आवास योजना से सपने हुए साकार

प्रधानमंत्री  आवास योजना गरीब लोगों के सिर पर छत मुहैया करवाने के लिए उम्मीद की किरण बन गई है। दूर-दराज के इलाकों के हजारों गुमनाम लोग इसके लिए तहे दिल से सरकार का शुक्रिया अदा कराते हैं। जालौर जिले के भवरानी गांव की 65 वर्षीया शांतिदेवी का जीवन इसी योजना से आसान हुआ है। शांतिदेवी के पति के स्वर्गवास को 12 वर्ष से ज्यादा का समय व्यतीत हो गया है । परिवार में एक बच्ची थी जिसके पीले हाथ कर विदा कर दिया । शांतिदेवी मजदूरी एंवम लोगो के घरो में कार्य करने के साथ विधवा पेशन के सहारे जैसे तेसे झोपडी एंवम बाद में कच्चे छप्पर के नीचे अपना जीवन यापन कर रही थी । सर्दी गर्मी एंवम बारिश के मौसम में शांति के घर में  अशान्ति आ जाती थी सर्दी में हवा रोकने गर्मी में गर्म हवा को रोकने के प्रयासो के साथ वर्षा में पानी से अपने छोटे-मोटे सामान एंवम गैस को इधर-उधर करने में अनेक बार घन्टो मशक्कत करनी पडती थी ।

ऐसे में वर्ष 2016-17 में ग्राम पंचायत भवरानी से उसको प्रधानमंत्री आवास बनाने का ना केवल संदेश प्राप्त हुआ बल्कि आवास का कार्य शुरू करने के लिये पहली किश्त भी खाते में प्राप्त हो गयी । ग्राम पंचायत के ग्राम सेवक हमीर खां एंवम पंचायत सहायक दयाराम ने उसे बताया कि मकान के कार्य के साथ जीओ जीआ टेकिंग हम अपने आप करेगे और  मकान जैसे-जैसे बनेगा पैसा आपके खाते में किश्त के रूप में प्राप्त होता जायेगा । शान्ति देवी ने मकान बनाने में सरकार की राशि के साथ स्वंय ने भी मजदूरी की उसका भुगतान भी सरकार ने एक वर्ष के मनरेगा की मजदूरी की राशि जोडकर कर प्रदान कर दी । शान्ति देवी को कुल एक लाख अडतालीस हजार दो सो अस्सी रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ है।  शान्ति देवी के सरकार के स्वच्छता अभियान में शौचालय पूर्व में ही बना हुआ है । शान्ति देवी ने एक वर्ष में उक्त राशि से  उपलब्ध जमीन में बाहर बरामदा कम रसोई एंवम एक कमरा तथा शोचालय निर्मित करवा दिया।  विधवा शान्ति देवी अब हर मौसम में सुकुन एंव शांति का जीवन यापन कर रही है ।

इसी गांव के थानाराम मीणा का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। थानाराम मीणा  के परिवार में कोई नही है । बारह वर्ष की उम्र में  ही मां-बाप का साया छूट गया था। स्कूल पढने की जगह मेहनत मजदूरी करके अपना पेट मुश्किल से पाल पाता था । कम उम्र में कार्य करने से शरीर में कमजोरी एंवम दमा जैसी बीमारी हो जाने से कोई भारी कार्य नही कर पाता है । ऐसे में गांव के मंदिर में हल्का कार्य साफ-सफाई एंवम दिया-धूप कर भक्तो से मिली राशि से अपना गुजारा पिछले बीस वर्षो से कर रहा है । स्वच्छता अभियान के तहत शोचालय तो पूर्व में बना हुआ है ।

गांव के बीपीएल सूची में नाम होने के कारण वर्ष 2016-17 में घर बैठे प्रधानमंत्री आवास योजना में चयन की सूचना ग्राम पंचायत केग्राम सेवके हमीरखा के  माध्यम से प्राप्त हुई। थानाराम मीणा ने बताया कि पहली बार महसूस हुआ कि भगवान की भक्ति के साथ राज की कृपा ने मेरे मकान के सपने को सिर्फ एक वर्ष में साकार कर दिया ।

नरेन्द्र कुमार तकनीकी सहायक  फील्ड आउटरीच ब्यूरो बाडमेर

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घर में आई रोशनी

बिजली मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक बन चुकी है इसलिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब बीपीएल परिवारों को निःशुल्क बिजली देकर ढाणी-ढाणी तक बिजली पहूचाने का कार्यक्रम दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति विधुतीकरण योजना के तहत शुरू किया हैं।

जैसलमेर जिले के भैलाणी गांव में डीडीयुजीवाई योजना का सफल क्रियान्वयन हुआ है। ग्राम के समाजसेवी रेवन्ताराम ने बताया कि ढाणीयों में कौसो दूर रहने वाले निर्बल एवं बीपीएल श्रैणी के लोगो ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके घर में भी रोशनी आएगी।  खास कर जैराराम पुत्र जग्गाराम मेघवाल जो कि शारीरिक रूप से विकलांग था उसे रोशनी की कभी आस भी नहीं थी ऐसे परिवार के घर जब रोशनी पहुंची तब घर में रोशनी देखकर पूरा घर झूम उठा। जैराराम मेघवाल के बच्चे अब लालटेन की रोशनी को छोड़कर बिजली की रोशनी में पढने के साथ घर में अन्य मजदूरी के कार्य भी करने लगे हैं जिससे उसके परिवार की स्थिति भी ठीक होने लगी है।

खीमराज सोनी क्षेत्रीय प्रचार सहायक  फील्ड आउटरीच ब्यूरो जैसलमेर

 

मुद्रा योजना बनी वरदान

सीमावर्ती जैसलमेर में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के सुखद परिणाम अब नजर आने लगे हैं। जिले के कई गांवों में युवाओं ने इससे अपने परिवार को आधार प्रदान किया है। मोतीराम ने राजस्थान मरूधर ग्रामीण बैक फतेहगढ से मुद्रा योजना के तहत दो लाख रूपये का ऋण लेकर स्टेश्नरी और फोटो कापी की दूकान संचालित की और धीरे-धीरे उसका व्यापार बढने लगा और आज वो अपने पैरो पर पूर्णतया खडा हो गया है।

अन्य ग्रामीण युवक हरीशचंद ने पहले सरकारी नौकरी के लिये प्रयास किया परन्तु सफलता नहीं मिली पर उसने बेरोजगारी से निजात पाने की ठान ली और अपनी पढाई के साथ मेडिकल की दूकान पर मजदूरी पर कार्य करने लगा समय के साथ कार्य का अनुभव भी हुआ और संबंधित मेडिकल र्कोस करके मेडिकल की जानकारी भी प्राप्त की परन्तु व्यापार के लिऐ रूपये नहीं थे ।

उसने जब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का नाम प्रचार कार्यक्रमों में सुना तभी अपने पैरो पर खड़ा होने और दूकान खोलने की ठानी और हिम्मत जुटा कर हरीशचंद ने राजस्थान मरूधर ग्रामीण बैक फतेहगढ से भारत सरकार की मुद्रा योजना के बारे में जानकारी प्राप्त कर दो लाख रूपये का ऋण लेकर दवाओं की दूकान संचालित की और धीरे-धीरे उसका व्यापार बढने लगा। आज वह अपने साथ अपने पूरे परिवार की जिम्मदेरी बखुबी निभा रहा हैं मोतीराम चौधरी के लिऐ प्रधानमंत्री मुद्रा योजना वरदान से कम नहीं है।

खीमराज सोनी क्षेत्रीय प्रचार सहायक  फील्ड आउटरीच ब्यूरो जैसलमेर

 

बागवानी खेती से किसानों की आमदनी में हुआ इजाफा

सवाई माधोपुर जिले के किसानों का रूझान पारंपरिक खेती को छोडकर बागवानी फसलों के प्रति बढने लगा है। जिला मुख्यालय के आस-पास के कई गांवों के किसान अब अपने खेतों में परंपरिक खेती को छोड अमरूदों की खेती कर लाखों रूपयों की आमदनी कमा रहे है। यही नही बागवानी खेती को बढावा देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को अपनी  ओर से अनुदान भी दे रहा है।

जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर स्थित दोबडा खुर्द गांव के प्रगतिशील किसान श्री पप्पू लाल मीना ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वे गेंहू चना सरसों ज्वार व बाजरे की ही परम्परागत खेती करते थे। लेकिन उद्यान विभाग सवाई माधोपुर की प्रेरणा से उन्होने आठ वर्ष पहले पांच हेक्टर में अमरूदों के पौधों का बगीचा लगाया थे। तीन साल तक बगीचे में अमरूदों के पौधो के साथ गैंहू चना व अन्य फसल भी लेते रहे। लेकिन जब अमरूदों के पौधे फल देने लगे तो उन्होने अन्य फसल करना बंद कर दी है। चार साल तक पौधे छोटे होने की वजह से बगीचे में बहुत ज्यादा फल नहीं लगने से आमदनी में बहुत ज्यादा इजाफा नही हुआ। लेकिन पौधों के पांच से छह साल के होने पर अब वे चार लाख से पांच लाख रूपये प्रति हैक्टर के हिसाब से अमरूदों की पैदावार पैदा ले रहे है। जो उनकी परम्परागत खेती की आमदनी से चार से पांच गुना ज्यादा है।

उन्होने बताया कि अमरूदों के बगीचों की सेहत एवं अच्छे उत्पान के लिए बूंद-बूंद सिचाई व जानवरों के गोबर व बकरियों की मेमनी वाली खाद ही ज्यादा कारगर है। उनके बगीचे में बर्फखाना गोला शरबती इलाहबादी सफेदा आदि किस्मों के अमरूदों की खेती हो रही है। इन किस्मों के अमरूदों की गुणवत्ता अच्छी होने से बाजार में इनकी मांग भी अधिक रहती है।

नरेश कुमार क्षेत्रीय प्रचार सहायक एफओबी सवाई माधोपुर

सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना

सवाईमाधोपुर जिले के छाण गाँव में सौर उर्जा से पानी की आपूर्ति का प्रयोग सफल रहा है। यहाँ सूरज की रोशनी बिजली का काम कर रही है तो टंकी भरते ही नलकूप की मोटर स्वतः ही बंद हो जाती हैं। न बिजली पर निर्भर रहना पडता हैं और न ही पानी व्यर्थ बहता हैं। बिजली व पेयजल संकट वाले गांवों में सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना बडी कारगार साबित हो रही हैं।

छाण की सरंपच श्रीमती अफसाना बानो ने बताया कि इस योजना से एक हजार तक की आबादी वाले गांव को पेयजल उपलब्ध हो जाता हैं। जलदाय विभाग व सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्ट्रूमेंटस लिमिटेड जयपुर द्वारा खण्डार उपखंड के बिजली व पेयजल संकट वाले गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा चलिज पनघट योजना का स्ट्रक्चर लगाया हैं। ग्राम पंचायत छाण के ग्राम गंगानगर मे पनघट योजना से पानी मिलना भी शुरू हो गया है। पेयजल योजना के पास ही टंकी के नीचे ही दो नल स्थापित हैं  जो पानी भरने के काम आते है। गंगानगर गांव के लोगों ने बताया कि पहले पानी का गंभीर संकट झेलना पड रहा था। दो से तीन किमी दूर से पानी लाना पड रहा था। योजना शुरू होते ही पानी का संकट दूर हो गया। अब तो घर बैठे ही गंगा आ गई।

श्रीमती अफसाना बानो ने बताया कि सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना पर लगभग नौ लाख रूपए का खर्चा आता है। योजना को पांच साल तक संचालित करने व मरम्मत की राशि भी इसमें ही शामिल हैं। योजना में कोई तकनीकी खराबी आती हैं तो उसे राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्ट्रूमेंटस लिमिटेड द्वारा ही ठीक करना है। गांवों में पेयजल योजना संचालित करने के लिए बिजली कनेक्शन कराना ही सबसे ज्यादा मंहगा पडता हैं। नलकूप से विधुत लाईन की दूरी ज्यादा होती है तो कई माह तक तो कनेक्शन ही नहीं हो पाता। इस योजना में बिजली कनेक्शन का झंझट हीं नहीं रहता। उन्होने बताया कि सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना के लिए जलदाय विभाग ने एक नलकूप लोहे का स्ट्रक्चर खडाकर पांच हजार लीटर क्षमता की टंकी रखवाई है। वही राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्ट्रूमेंटस लिमिटेड ने स्वचालित मोटर को चलाने के लिए सौर ऊर्जा चलित सिस्टम स्थापित किया है। सिस्टम में स्वचालित लेबल कंट्रोलर व लेबल इंडीकेटर स्थापित हैं। टंकी के भराव क्षमता के लेबल पर आते ही नलकूप की मोटर स्वतः ही बंद हो जाती हैं। पनघट योजना पर बैटरी रहित सौर ऊर्जा की प्लेट्स लगाई है जो शाम को सूर्य की रोशनी बंद होते ही बंद और सुबह सूर्य की रोशनी के साथ स्वतः ही चालू हो जाती है। योजना से आस-पास के गाँव में पानी मिलना शुरू हो गया हैं।

नरेश कुमार क्षेत्रीय प्रचार सहायक एफओबी सवाई माधोपुर

गुवाड को अतिक्रमण से मुक्त कराकर सी सी रोड निर्माण

        श्रीमती कृष्णादेवी ने ग्राम पंचायत में अतिक्रमण के खिलाफ कदम उठाया। गांव के कुछ परिवारों ने गांव की गुवाड में पशुओं के गोबर भूसा इत्यादि सामान डालकर अतिक्रमण कर रखा था। जिससे पूरे गांव को परेशानी हो रही थी। श्रीमती कृष्णादेवी सरपंच ने गांव के गणमान्य लोगों को अपने साथ लेकर गुवाड़ को अतिक्रमण से मुक्त कराने का बीडा उठाया और गांव की गुवाड़ को अतिक्रमण से मुक्त कराने में सफलता हासिल की। उन्होंने  एसएफसी 5  योजना के अन्तर्गत 6 लाख 75 हजार की राशि खर्च करके पूरे गुवाड़ के परिसर में पक्की सीमेन्ट की ईटें बिछवाकर सी सी रोड की तरह पक्का बनवाया।

नेमीचन्द मीना क्षेत्रीय प्रचार सहायक एफओबी श्रीगंगानगर

 

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